रोज़ की तरह,
आज भी भोर से ही
सूरज ने खोल रखा है
दिन का कैमरा,
धरती के जागते चेहरे पर
रोशनी की रील चलाते हुए।
और पृथ्वी का घूमना
हर पल रच देता है
समय की एक नई तस्वीर,
क्षण-दर-क्षण।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X