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बाढ़ को निहारती आँखें

                
                                                         
                            बाढ़ को निहारती आँखें
                                                                 
                            
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प्रलय की विभीषिका आँखों के सामने घटती रही,
फिर भी आँखें नदी की वेगवती लहरों की सुंदरता में अटक गईं।
प्राणों की करुण पुकार कानों तक पहुँची ही नहीं;
ये सारे दुःख-प्रलय भी तो
भविष्य में बैठकर
आनंद से देखे और टाल दिए जाने वाले
स्मृति-चित्र ही हैं।
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2 महीने पहले

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