महत्वपूर्ण बहुमुखी गृह-हिस्सा
है छत उपयोगी, दिवस निशा
हवा,धूप, हर वक्त उपलब्ध
रहे सूरज,वायु की कोई दिशा।।
पारिवारिक एकता का छंद
नहीं पड़ने देता संबंध मंद
लेते खुले में संग संग चुस्की
शुरूआत कर देता बातें रुकी।
सुखाने, फैलाने हों कोई अन्न
दैनिक उपयोगिता का चमन
टहलना,खेलना, करना योग
सब में आता छत प्रयोग ।।
गृह वाटिका का यदि शौक
उपयोगित होता खुला चौक
हों छोटे उत्सव, पर्व , पूजा
नहीं इसके सम जगह दूजा।
मांगलिक, रंगोली,चित्रभितियां
आसानी से बनती कलाकृतियां
पेड़ के झूले का , घर बैठे पेंग
कृत्रिम झूलों को बनाता नेग।
घर में छत तक हो उद्धाहक
वृद्ध,अशक्त,शरीर का वाहक
छत हो जाता सुगम तल
एकांत, बुढ़ापे का श्रेष्ठ स्थल।।
-विजय बहादुर तिवारी उर्फ
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