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अभी चिराग जलेंगे

                
                                                         
                            धुंध में गुम जो रास्ते हैं,
                                                                 
                            
उन पर कदम बढ़ाना सीखो।
हार के डर से रुकना कैसा,
खुद ही राह बनाना सीखो।

ज़माना तो तंज कसेगा,
हर इक मोड़ पर तोड़ेगा।
पर जो गिरकर संभल गया,
इतिहास वही फिर लिखेगा।

आँखों में जो ख्वाब बसे हैं,
उन्हें नींद में मत बहने दो।
सीने में जो आग दबी है,
उसको थोड़ा और सुलगने दो।

काली रात का पहरा लंबा,
पर सूरज तो आएगा ही।
आज जो पत्थर चुभते पैरों में,
कल वही मंज़िल का रास्ता दिखाएगा ही।

ना पूछो मेरी औकात क्या है,
अभी तो सिर्फ़ शुरुआत हुई है।
तूफ़ानों से टकराने की,
आज इरादों में बात हुई है।

हिम्मत की इस ढाल को थामो,
खामोशी से अब काम करो।
अपनी मेहनत के दम पर,
दुनिया में खुद का नाम करो।

मंज़िल दूर सही पर मिलेगी जरूर,
बस हौसलों को ज़रा संभाले रखना।
अंधेरों से लड़कर ए मुसाफ़िर,
उम्मीदों का चिराग हमेशा जलाए रखना।
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4 घंटे पहले

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