कब आओगे ...,
कहो ना आओगे ..
क्यों नहीं कहते ?
क्या तुम्हे आना नहीं ...
क्यों नहीं आना ?
क्या मुझसे बातें नहीं करनी ...?
क्यों नहीं करनी ?
क्या मेरी याद नहीं आती ...
क्यों नहीं आती ?
क्या कभी नहीं आएगी ...
क्यों नहीं आएगी ?
क्या कभी नहीं आओगे ?
सच्च में !!!
पर क्यों नहीं आओगे ?
क्या मुझसे दूर होके खुश हो ...??
पर क्यों हो ?
तुम तो कहते थे ना कि मैं हु तब तुम खुश हो .....
फिर मेरे बिना खुश कैसे हो ?
क्या मिलना नहीं चाहोगे ?
क्यों नहीं चाहोगे ?
इतनी बुरी हु क्या मैं ??
पर हु तो तुम्हारी ही........
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