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औरत....

                
                                                         
                            मैं बोल न सकी
                                                                 
                            
आवाज उठा न सकी
मेरे कपड़े फाड़े,
बाल नोचे गये
पर कुछ न कर सकी
इसका मतलब ये नहीं कि
मुझे बोलना नहीं आता
बल्कि मेरी आवाज दबाई गई
मुझे सताया गया
क्यों ?
क्यूंकि दूसरी औरत को कहते है सुना
अपनी मर्जी से बाहर घूमने वाली का होता है हाल यही
क्या? एक औरत अपनी मर्जी से जी नहीं सकती
क्या उसे घूमने की आजादी भी नहीं
कौनसा समाज ...
कोनसे चार लोग..
कोनसी बेइज़्ज़ती ...
मेरे जीवन से ऊंचा तो
मर्द का अहंकार भी नहीं.....
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2 महीने पहले

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