प्यार से पूछा है सच में नफ़रत से जवाब मत देना
दिल का अमीर हूं अपनी गरीबी का हिसाब मत देना
मक़तब से मदीना तक है मुहब्बत ज़िस्त की कर्बला
इश्क इबादत में गम- ए- दिल की किताब मत देना
सुना है लाख हैं तारे टिमटिमाते तेरे घर की छत पर
मैं आफ़ताब वफ़ा का बेवफ़ाई का हिज़ाब मत देना
शहर है रौशनी में गुम मायूस दिल बड़ा मासूम-सा
दुआ में गाफ़िल दिल को कभी ज़हर-शराब मत देना
जिस्म फ़कत है वक़्ती सख़्त है जमाने का उसूल
रूहानी इश्क़ है अपनी इसे शक्ल-ए-शबाब मत देना
-भास्करानंद झा भास्कर
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