आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

रामलला दर्शन

                
                                                         
                            राम कहत हैं, राम सुनत हैं
                                                                 
                            
राम कृपा, आज नयन भरत हैं

देखो रामलला, ऐसे ही देखो
दशरथ लाल, तुम मुस्कत देखो
नयन हटावत, हृदय भरत है

दर्शन आतुर, शिव दौड़त हैं
दर्शन देने , राम रोवत हैं

नटखट सरल, दास के स्वामी
आगमू बनी, शिव-राम खेलत हैं

सोचत राम रस , ये नगरी पैंसे
रामकृपालु, रस राम बहत हैं

राम कृपा, आज नयन भरत हैं ।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर