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मेरी तस्कीन का बन जाए हवाला शायर

                
                                                         
                            मेरी तस्कीन का बन जाए हवाला शायर
                                                                 
                            
शेर ऐसा भी कहो कोई मसीहा शायर

ऐ मेरी जान-ए-ग़ज़ल, ऐसे तो मायूस न हो
कोई तो होगा तेरा चाहने वाला शायर

तुम तसव्वुर हो, तख़य्युल हो, तुम्हीं ख़्वाब-ओ-ख़याल
तुम को पाकर के मुकम्मल हो अधूरा शायर

मसलहत रब की वही जाने मगर सोचता हूँ
कुछ तो है राज़ अगरचे है बनाया शायर

एक ख़मीदा सा बदन और मकीं हैं इतने
मैं हूँ और तुम हो और एक दरीदा शायर

इनसे ख़िदमत तो भला क्या ही सुख़न की होगी
ऐसे-वैसों पे जो लिखते हैं क़सीदा शायर

अपनी ग़ज़लों की क़सम खा के किया है वादा
कैसे तोड़ेगा मेरी जान भरोसा शायर

रूह तो एक है गर जिस्म जुदा हैं अपने
तुम हो दीवान मेरा, मैं हूँ तुम्हारा शायर

जब कि नफ़रत का अँधेरा है जहाँ में हर सू
ले के आया है मोहब्बत का उजाला शायर

लाख तल्ख़ी थी ज़माने से मगर ज़र्फ़ तो देख
फिर भी लिखता है मोहब्बत का मक़ाला शायर

अब कहाँ चाहने वाले हैं, कहाँ मैं हूँ, बिलाल
अब कहाँ कोई मुझे कहता है प्यारा शायर

 
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2 महीने पहले

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