आँखों में मूरत साजे, होठों पे बस एक नाम,
साँसों की हर धड़कन में, बस बसे हुए घनश्याम।
दुनिया की सारी मोह-माया, झटके में बिसरा दी,
मीरा ने अपनी सारी सुध, उस साँवरे पे लुटा दी।
छोड़ दिए सब महल-खजाने, छोड़ दिया संसार,
बाँध लिए पैरों में घुँघरू, कैसा है यह प्यार।
लोग कहें बावरिया इसको, जग ने ताने मारे,
पर मीरा की आँखों में तो, नाचे कृष्ण मुरारे।
विष का प्याला भेजा जग ने, मीरा हँसकर पी गई,
मरने की बातों के आगे, वो तो जीवन जी गई।
भूल गई वो खुद की हस्ती, रंगी उसी के रंग में,
मीरा का तो कण-कण अब है, बस गिरधर के संग में।
प्रेम जोगन की यह गाथा, युग-युग तक गाई जाएगी,
भक्ति की जब बात चलेगी, मीरा याद आएगी।
दुनिया के सब बंधन झूठे, एक आस बस साँची,
गिरधर की धुन में मगन हो, मीरा छम-छम नाची।
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