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जीवन का सत्याग्रह

                
                                                         
                            सत्य की लौ को सीने में, जो हरदम जलाए रखता है,
                                                                 
                            
तूफानों के बीच अकेले भी, जो राह नया गढ़ता है।

अन्याय की हर दीवार से, जो बिना डरे टकराता है,
वही तो इस जीवन का सच्चा सत्याग्रही कहलाता है।

न बल से, न छल से, वह मन की ताकत को अपनाता है,
अडिग रह कर अपने पथ पर, वो दुश्मन को भी झुकाता है।

हार न माने, थक कर बैठे, यह उसकी फितरत नहीं,
कंटकों भरे पथ पर चलना ही, उसकी इकलौती चाहत है यहीं।

चाहें जितने प्रहार हों जग के, अडिग हिमालय सा डट जाता है,
मौन रहकर भी वह अपनी हर बात का लोहा मनवाता है।

अहिंसा का शस्त्र उठाकर, जो विजय पताका फहराए,
जीवन का यह सत्याग्रह, हर युग में अलख जगाए !!
-बाबूलाल पारीक 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

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