थोड़ी नैतिकता नहीं, राष्ट्र हुआ गमगीन।
नेताओं को देखिए, बजा रहे हैं बीन।।
बजा रहे हैं बीन, तंत्र में गड़बड़झाला।
राजनीति के नाग, फेरते नकली माला।।
होती है उत्कोच, देश की किस्मत फोड़ी।
सभी करें परवाह, मदद हो थोड़ी-थोड़ी।।
-अविनाश ब्यौहार
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