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प्रेम की ढाल

                
                                                         
                            जब मैं मेरी
                                                                 
                            
बुराइयों के बारे में सोचता हूँ
या दूसरों से मेरी तुलना करता हूँ
या सोचता हूँ कि
ऐसे बहुत से लोग हैं
जो मेरे से बेहतर हैं
क्योंकि तभी तो
लोगों को
लोग अच्छे लगते हैं, मैं नहीं
पर तभी... तुम्हारे रूप में
मुझे एक संबल सा मिल जाता है।

तुम्हें मेरी जरूरत हो
या मुझसे प्रेम हो
या मेरे प्रेम ने
तुम्हें मुझसे प्रेम करवा दिया हो
ये सभी कारण हो सकते हैं
फिर भी
मैं सोचता हूँ कि
तुम हो तो कोई तो है..
जिसे मैं पसंद हूँ
जिसे मेरी बुराइयाँ कम दिखती हैं
मेरी अच्छाईयों से जो प्रभावित है
मेरे तन, मेरे मन
मेरे गुणों से जो आकर्षित है
सच कहूँ तो
तुम्हारा प्रेम एक ढाल है
मेरी हीनभावना के
प्रहार से बचने के लिए..
.-अवतार सिंह अक्षरजीवी
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2 महीने पहले

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