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दार्शनिक

                
                                                         
                            जिन लोगों को देखता हूँ प्रेरणा देते हुए
                                                                 
                            
या मंच पर प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए,
ऐसे जितने भी आदर्शवादी लोग हैं
उनमें से कोई भी मेरे जैसा नहीं लगता।

जो लोग आलीशान मकान में रहते हैं
उन्हें टूटे-फूटे घर का मर्म नहीं पता
जो लोग शानदार शरीर में रहते हैं
उन्हें विकृत देह की पीड़ा नहीं मालूम
जो लोग जीवन को सुरक्षित कर चुके हैं
उन्हें असुरक्षित साँसों की क्या जानकारी

जब व्यक्ति को कोई दुख ही नहीं है
जो कभी दुर्भाग्य से आहत नहीं हुआ
जिसने कभी डूबने का अनुभव नहीं किया
जो व्यक्ति समुद्र के किनारे पर खड़ा है..वो
लहरों को सुंदर मानकर दार्शनिक हो जाता है।
-अवतार सिंह अक्षरजीवी
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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