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कांच का मुखौटा

                
                                                         
                            मुस्कान बसी है, बही नहीं, चेहरे पर,
                                                                 
                            
सच्चाई फंसी है, कहीं नहीं, चेहरे पर,
फरेब से सजाया मुखौटा, चेहरे पर,
नाज़ुक कांच का है गहना, चेहरे पर।

सजी चमड़ी, इज़हार मैला है, चेहरे पर,
चमकता मुखौटा, गहरा साया है, चेहरे पर,
रंगीन पर्दा, नज़ारा बेरंग है, चेहरे पर,
साफ़ होंठ, मुस्कान धुंधली है, चेहरे पर।

खिले फूल, जड़ें सड़ी हैं, चेहरे पर,
टिमटिमाते तारे, आसमान फीका है, चेहरे पर,
मीठा किनारा, नदी कड़वी है, चेहरे पर,
खूबसूरत परिंदे, उड़ान दबी है, चेहरे पर।

कांच का मुखौटा, पहना था, चेहरे पर,
टूटा घुटन से, खून बहा है, चेहरे पर,
लाल रंग से सच्चाई लिखी है, चेहरे पर,
झूठ की लकीरें मिटी हैं, चेहरे पर,
एहसास जगा है, एक नया चेहरा बना है,
पर कोई मुखौटा नहीं इस मर्तबा, चेहरे पर।
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3 महीने पहले

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