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कश्ती और किनारा

                
                                                         
                            कदम न रोक बढ़ाये जा देखा जायेगा
                                                                 
                            
पैर में छाले पड़ेगे तो देखा जायेगा

तूँ सबके दिल में आयेगा ये ज़रूरी तो नहीं
नागवार गुज़रेगा भी तो,देखा जायेगा

वो अपने आप को साबित समझ के बैठा है
नासमझ कह भी दिया है तो देखा जायेगा

अकेला है तो सफर को ज़रा रूस्वा कर ले
कदम बढ़ाये चल,जो होगा देखा जायेगा

सभी तैयार हैं तुझपे ऊछालने को कीचड़
मुशलशल चलता ही रह जो होगा देखा जायेगा |
-अतुल सिंह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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