कई रातों को मिला कर मेरी
एक रात होती है।
यादों में गुज़रे लम्हों की जब
बरसात होती है।।
बरसों गुज़ारे है हमने तन्हाइयों
के संग।
जाने कहां दिल से दिल की
मुलाक़ात होती है।।
मेरे दिल में छुपी बैठी है ख़ामोश
सी कसक।
गाहे-बगाहे उससे मेरी मुलाक़ात
होती है।।
एक रोज़ मिल जाएंगे मेरी वफ़ा
का सिला।
इसी इंतजार में ज़िंदगी अवसान
होती है।।
परछाइयों के पीछे पीछे
भागते हुए।
एक रोज़ अपने आप से
मुलाक़ात होती है।।
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