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जीवन धन्य हो जाता,मुझमें अगर तुलसी-पौधा उगता

                
                                                         
                            काश! मैं एक गमला होता
                                                                 
                            
स्वयं बड़े- बड़े भवनों की शोभा बनता
और मेरी शरण पाकर,
एक सूक्ष्म सा बीज भी बड़ा वृक्ष बन जाता
उसको पालने में सर्दी-गर्मी,धूप -बारिश सब सहता
दिन-रात उसकी देखभाल करता,
न दिन में न रात में, न विश्राम करता, न सोता
काश! मैं एक गमला होता

काश! पौधों का पालनहारा बनता
अपना भोजन-पानी स्वयं न खाकर
भूखा रहकर, मेरे पौधों को दे देता
और प्रश्नता से झूम जाता
जब उनको बड़ा होते देखता
होता गर्वित जब वह मुझ से भी बड़ा हो जाता
काश! मैं एक गमला होता

ये इच्छित है कि अच्छे-अच्छे फूल और
फल देकर, अपना और मेरा नाम चमकाता
मेरे पौधे से खिलें फूल और
सुगंध से सारा उपवन महक जाता
ऐसे संस्कार देता, अन्नदाता बन कर और
करके भवनो का सौन्दर्यकरण,जगत कल्याण करता
झूमता जब मेरे पौधे के फल-फूल स्वीकृत करते विधाता
काश! मैं एक गमला होता

जीवन धन्य हो जाता,मुझमें अगर तुलसी-पौधा उगता
काश तुलसी-चौरा ही बन पाता
मेरा तुलसी-पौधा शुद्धता,भक्ति,आध्यात्मिक सुरक्षा
सांस्कृतिक और धार्मिकता का प्रतीक बनता
पर्यावरणीय प्रतिबिंब बनकर फैलाता जागरूकता
जग -कल्याण का माध्यम बन जाता
अगर ये सब कुछ हो पाता
काश! मैं एक गमला होता
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5 दिन पहले

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