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मुसाफिर हूं चलते रहना ही नियति मेरी

                
                                                         
                            मुसाफिर हूं चलते रहना ही नियति मेरी
                                                                 
                            
इक दिन तेरी यादों से भी चला जाऊंगा
पर जाने से पहले डूबते हुए सूरज की तरह
मन क्षितिज पे अपनी चमक छोड़ जाऊंगा

जीवन पथ जब कभी धुंधला दिखाई देने लगे
किसी चौरस्ते पे किधर जाऊं मन दुविधा में लगे
प्रिय तब अपनी आंखें मूंद कर हृदय में झांकना
अंतर्मन की रोशनी में मार्ग प्रशस्त हो जाएगा
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3 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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