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सजा कर रखते हैं

                
                                                         
                            सपनों की सौगात सजा कर रखते हैं।
                                                                 
                            
हम दिल में जज्बात सजा कर सकते हैं।।
पतझड़ का आलम है जीवन बंजर है।
पर दिल में बरसात सजा कर रखते हैं।।
पग पग पर कांटे बिखरे हैं राहों में ।
ख्वाबों में जलजात सजा कर रखते हैं।।
कदम कदम पर लोगों ने तोड़े सपने ।
पर सपने दिन रात सजा कर रखते हैं।।
अर्जुन गहन निराशा में आशा पालो।
दीपों की बारात सजा कर रखते हैं ।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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