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जीवन के अनसुलझे प्रसंग

                
                                                         
                            जीवन के अनसुलझे प्रसंग !
                                                                 
                            
चल रहे युगों से संग -संग ।।

किसने देखा, किसने जाना
जीवन का पथ तो अनजाना
जग विस्तृत ,दृष्टि मगर सीमित
वर्णन इसका बस मनमाना
होते इसके अनगिनत रंग ।
जीवन के अनसुलझे प्रसंग !

कोई कहता सुंदर उपवन
कोई कहता है गहन विजन
कोई - मरुथल की रेत राशि
कोई कहता कुसुमित कानन
सबके कहने के अलग ढंग ।
जीवन के अनसुलझे प्रसंग!

पल में तोला,पल में मासा
जीवन की क्या हो परिभाषा
सुख - दुःख के रूप अनिश्चित हैं
क्या व्यक्त करे इनको भाषा
सागर के ये उठते तरंग ।
जीवन के अनसुलझे प्रसंग!

जीवन अनबूझ पहेली है
सुख - दुख की आंख मिचौली है
सांसों के ये संगीत क्षणिक
आहें हमराज - सहेली हैं
व्याकुल मन के आहत कुरंग ।
जीवन के अनसुलझे प्रसंग!

जीवन से भिन्न नहीं उलझन
कोई करले जो लाख जतन
ये सूत्र न अब तक सुलझ सके
युग से प्रयासरत अंतर्मन
निस्सीम व्योम - यह लघु विहंग।
जीवन के अनसुलझे प्रसंग!

आहों से ही संगीत बने
अरि भी जीवन में मीत बने
सोचों की धार पलट जाए
तो सहज हार भी जीत बने
हो जाए निराशा भी उमंग ।
जीवन के अनसुलझे प्रसंग!
 
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6 घंटे पहले

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