ले लोहा झंझावातों से जो, बांधे विभु के उत्ताल तरंग ।।
शौर्य पताका गगन चढे, पवन बजावे उन खातिर मृदंग ।।
चहुं ओर चर्चे चलने लगें और उनकी गाथा बने अनंग।।
कीर्ति पताका उनकी जब फहरे, हो जाते हैं कायर दंग।।
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