दुनिया दीवानों पर नीर बहाने कब आती है
दुखते रग पर चटखारे ले कहानी बनाती है ।।
दुखड़ा सुनने पर जिस मुखड़े पर करुणा छाती है
जरुरत पर वह सूरत मुंह बिचकाती है।।
बहुतायत लोग हैं यहां बस केवल कारोबारी, जग,
उन खातिर क्या, कारोबार ही जिनकी थाती है ।।
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