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अरमान जलते हैं

                
                                                         
                            वही रोएगा जिसको दर्द का एहसास होगा
                                                                 
                            
कहां रोते हैं पत्थर दिल नहीं सीने में जिनके
बड़ी खामोशी से उसने छुड़ा लिया दामन
कभी खाई थी कसमें जिसने साथ रहने की
यादों के समंदर में डूब कर हमने देखा है
वहां बस लहरें उठती हैं समंदर नहीं होता
हर वक्त की तकरार से अच्छा यही होगा
रहें बस दूरियां कायम दिल का दर्द अच्छा
वो कहते थे आपके साथ हैं कुछ नहीं होगा यही एहसास काफी है ज़हन में नफ़रत का
वो दिन भी खास थे बड़े सुहाने से सपने थे
रूह में आग बनकर वही अरमान जलते हैं
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3 महीने पहले

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