जाने कैसे तूने दिल को मनाया होगा
जब मेरा आख़िरी ख़त तूने जलाया होगा
कांपते हाथ बढ़े होंगे जब ख़त की तरफ़
दिल तेरा ज़ोर बड़ी ज़ोर से धड़का होगा
जब उस ख़त पे तूने डाली होगी चिंगारी
एक शोला सा तेरे जिस्म में भड़का होगा
हर एक लफ्ज़ मेरे, दर्द से चीखे होंगे
तेरे रुख़्सार भी तो अश्क से भीगे होंगे
राख टपकी होगी जिस ज़मीं पर जाना
उस ज़मीन का भी दिल दहल गया होगा
ये सोच-सोचकर मैं और भी हूं परेशान
कि जाने किस तरह से तेरा दिल मचल गया होगा
अकेले ही सहा होगा तूने सबकुछ
राज़ की बात है, किसी से न बताया होगा
जाने कैसे तूने दिल को मनाया होगा
जब मेरा आख़िरी ख़त तूने जलाया होगा
उस आग का धुआं तेरी आंखों में
अभी तक सुर्ख़ शोले की तरह रखा है
मैं जानता हूं कि कैसे ये पत्थर दिल पर
तूने एक आग के गोले की तरह रखा है
वो आग रह-रहकर तेरे दिल को जलाती होगी
तू हाल अपना जाने किस से बताती होगी
दर्द अपना तूने किसको बताया होगा
जब मेरा आख़िरी ख़त तूने जलाया होगा
मेरी मोहब्बत की वो सारी खुश्बू
जो कभी उस ख़त में समाईं थीं
मेरी उल्फ़त की वो सभी प्यारी बातें
मैने लफ़्जों के दरमियाँ जो छुपाईं थीं
वो महक फैल गई होगी तेरे कमरे में
मेरी हर बात दीवारों पे छप गई होगी
वो एक खिड़की जो है तेरे कमरे की
मेरी बातों, मेरी आहों से सज गई होगी
मेरी मोहब्बत से भरा वो रंगीन निशां
तूने किस तरह लोगों से छुपाया होगा
जब मेरा आख़िरी ख़त तूने जलाया होगा
उस ख़त के साथ सारे ख़्वाब जल गए जाना
मेरी उल्फ़त के माहताब जल गए जाना
वो एक डोर जिसमें दोनों बंधे थे कब से
वो डोर टूट गई, और वो रब्त छूट गया
आज न ख़्वाब है, न ख़त है, न निशानी है
शायद यही अब हमारे प्यार की कहानी है।
-अनमोल
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