जब रोटी नहीं है तो वादों को लपेट लूं क्या?
रोटी नहीं है तो क्या पेट को समेट लूं क्या?
बोलो चांद, मंगल पर जाने वालों!
पांच साल बाद गली में आने वालों!
भूखे पेट चांद देखूं कैसे?
भूखे पेट भजन सहेजूं कैसे?
भूखे पेट संदेश भेजूं कैसे?
- सहज कुमार
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