बिहार के मिट्टी से जन्में,
हिन्दुस्तान के थे वह लाल।
सदाचार के थे वह मूरत,
भोली थी जिनकी सूरत।
काशी थी जिनकी जरूरत,
मानवता थी जिनकी सीरत,
गले में शारदा मां का वास था।
काशी से उनका स्नेह कुछ खास था,
उन पर लोगों को नाज था।
काशी उनका निवास था,
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान उनका नाम था।
दुनिया भर में उनका पहचान था,
बाबा विश्वनाथ, संकटमोचन उनका जान था।
शहनाई ही उनका पहचान था,
शहनाई में गूंजता उनका तान था।
- अंकित कुमार
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