झूम रही नीम की डाली
झूम रही अमवा की डाली
बह रही पावन पवन पानी
कह रही सुंदरता की कहानी
नाच रहे पत्ते मतवाले
नाच रहे हैं हम मतवाले
भींगा मन,भींगी हर डाली
भर रही प्यार की थाली
नहा रहे घर,छत,छप्पर
स्वर्ग उतरा आज धरा पर।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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