सुंदर तरूणी जैसी प्रकृति सुंदरी मुस्काए
उत्तर कर आज स्वर्ग धरा पर आए
सुंदरता छलके
हल्के-हल्के
देखो, स्वर्ग चल के
धरती डोले, झूमे अंबर
स्वर्ग उतरा आज धरा पर
प्रकृति सुंदरी बैठी बन ठन कर
नदी के किनारे
अपनी अलकों को संवारे।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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