जिसके हृदय में छल कपट नहीं है
सुखी वही है हमेशा खुश वही है
है कौन ऐसा जग में
दुःख नहीं है उसके मग में?
पास जिसके ईर्ष्या,द्वेष नहीं है
पास जिसके अहंकार नहीं है
जिसको ज्यादे पैसे की भूख नहीं है
खुश वही है
सुखी वही है
चाहिए क्या जीवन में,कौन बड़ा सा दान?
दो जून, दो रोटी,दो वसन एक मकान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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