मन से लक्ष्य बनाया
श्रम से लक्ष्य पाया
मैंने सोचा इसे पाने से सुख मिलेगा
मैंने सोचा दुःख का पहाड़ हिलेगा
पर सुख मिला नहीं
दुःख का पहाड़ हिला नहीं
सुख भी एक भरम है
करना केवल करम है
दुःख को सुख समझना होगा
जीवन की पहेली को बुझना होगा
सुख के चाह में
पाते दुःख राह में
दुनिया एक भरम है
करना केवल करम है
करम में कैसा शरम है?
निभाना मानव धरम है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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