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सुगंधित भुवन हो

                
                                                         
                            कोमल कोमल कमल की कलियां
                                                                 
                            
निर्मल निर्मल निकलती कलियां
इनकी तरह हमारा निर्मल मन हो
इनकी तरह हमारा निर्मल तन हो
इनकी तरह हमारा सुंगधित जीवन हो
इनकी तरह निर्मल नील गगन हो
इनकी तरह स्वच्छ हमारा वतन हो
इनकी तरह हमारा भवन भुवन हो
इनकी तरह हमारा अर्जित धन हो
इनकी तरह पुलकित हर क्षण हो।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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3 सप्ताह पहले

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