हैं हम हिंद के वतन से
हैं हम धर्म सनातन से
हैं हम भारत भुवन से
हैं हम पावन वतन से
हैं हम बागी बलिया से
हैं हम बागी बैरिया से
हैं हम संयमित वतन से
हैं हम राम के वतन से
हैं हम श्याम के वतन से
हैं हम शिवा के वतन से
हैं हम प्रताप के वतन से
हैं हम मंगल पांडे के वतन से
हैं हम चित्तु पांडे के वतन से
हैं हम बलिदानी वतन से
हैं हम ज्ञानी वतन से
हैं हम गंगा तट से
हैं हम यमुना तट से
हैं हम गुदरी सिंह के टोला से
हैं हम पांडे पुर बैरिया बलिया से
हैं हम अखंड भारत बनाने वाले
हैं हम अपना अक्साई चिन लाने वाले
हैं हम भारत में के वीर सपूत
हैं हम देवदूत, हैं हम अग्रदूत
है इतना पहचान यही
है इतना मान सम्मान यही
चलो मिलते हैं विकसित हिंद करके
चलो मिलते हैं " जय हिंद" कह के।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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