आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ओ चिड़िया!

                
                                                         
                            ओ छोटी चिड़िया!
                                                                 
                            
ओ प्यारी चिड़िया!
रूको, मुझसे बतियाओ
अभी उड़ मत जाओ
आओ पास मेरे आओ
मैं मारूंगा नहीं
मैं तुम्हें कैद करूंगा नहीं
डरो मत,ओ दुलारी चिड़िया!
ओ गोरैया! ओ न्यारी चिड़िया!
तुम मेरी आस हो
तुम मेरी सांस हो
तुम्हारी जरूरत जग को है
तुम्हारी जरूरत सबको है
पेड़ पौधे मैं लगाऊंगा
तुमको मैं बुलाऊंगा
तुम घोंसला बनाना
तुम जरूर आना
मैं घोंसले को तोड़ूंगा नहीं
मैं प्यार की डोर तोड़ूंगा नहीं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर