संभल संभल कर
सोच समझकर
लक्ष्य पर चल
राहों को फूंक फूंक कर चल
तेज चल,पर सावधानी से चल
वर्तमान में रह कर निरंतर चल
कर मत छल
कर मत कपट कर्म कभी
कर मत शर्म कभी
समझ अपना धर्म अभी
सच्चाई पर साहस से चल
बन कर सिपाही शान से चल
जीत जाओगे आज नहीं तो कल
ओ राही रे! निरंतर चलता चल।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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