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गीता के श्लोक समझ में नहीं आते हैं

                
                                                         
                            मेरे सामने मेरा बेटा गया
                                                                 
                            
लोग कह रहे हैं क्या गया
क्या हुआ?
कैसे कहूं क्या हुआ
क्या गया?
मेरे दिल का टुकड़ा गया
लोग कह रहे हैं कुछ नहीं गया
जाना तो सबको है
रहना यहां किसको है?
पर बाप के सामने बेटा का जाना
है वैसे ही जैसे हाथ से भाग्य का जाना
है वैसे ही जैसे कुछ देकर छिन ले जाना
फिर कहना जिसने दिया
वही लिया
गीता के श्लोक समझ में नहीं आते हैं
जब अपने सामने से चले जाते हैं
फिर वापस नहीं वे आते हैं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

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