देश हमारा जब जब सोया
अपनी अस्मिता को तब तब खोया
अब नहीं हम सोयेंगे
क्रांति के बीज बोयेंगे
एक सूत्र में बंधेंगे
शुत्रुओं को वधेंगे
चलो खाएं कसम हम
नहीं कभी डरेंगे हम।
- सहज कुमार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X