कैसे भूलूं तेरे मधुर मुस्कान को मैं?
कैसे भूलूं ,तेरे गौरव गान को मैं?
तुम तो चले गए,हमें रुला कर
हम रह गए,इस धरा पर
अच्छे लोगों की मांग ऊपर भी है
भू पर भी है
पुनः आओ धरा पर
बैठे हैं हम पलकें बिछा कर
तेरा वो खिलखिलाना
याद आता है वो जमाना।
- सहज कुमार
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