जीत हौसले से जीते जाते हैं
दोनों हाथों से तलवार चलाए जाते हैं
शीष कट जाए तो धड़ लड़ जाते हैं
मुठ्ठी भर सैनिक,करोड़ों की सेना को हराते हैं
हम अकबर और राणा प्रताप की बात बताते हैं
जहां चेतक शेर बना था
जहां शेर पर शेर सवार था
जहां राणा योद्धा नहीं,शिव के अवतार थे
अकबर कभी सामने राणा के आया नहीं
हमेशा राजपूतों को राजपूतों से लड़ाया
कभी युद्ध जीत नहीं वह पाया
कूटनीति, कुटिल चाल कुछ भी काम आया नहीं
शक्तिशाली होकर भी कभी जीत वह पाया नहीं
याद करके राजस्थान की शान को
उस पुराने हमारे हिंदुस्तान को
गर्व से सीना चौड़ा हो जाता है
फिर वही साहस वापस क्यों नहीं आ पाता है?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X