समस्याओं को हंस के झेलो
समस्याओं से खेलो
जीवन नैया को शान से खे लो
समस्याओं को चुनौती बोलो
बांधाओं को चुनौती बोलो
चुनौती समझ कर दो ललकार
एक बार जोर से दो हुंकार
साहसी निडर बन कर
चलो चुनौतियों के सामने तन कर
चलो वीर बन कर
जीत लो अवनी और अंबर।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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