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जीवन जीने का पाठ

                
                                                         
                            चूप हूं तो घमंडी कहलाता हूं
                                                                 
                            
बोलता हूं तो बातूनी कहलाता हूं
जोर से बोलता हूं तो झगड़ालू कहलाता हूं
कैसे रहूं कोई बताए?
जीवन जीने का पाठ पढ़ाए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
9 घंटे पहले

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