आज का इंसान तप त्याग करता नहीं है
बिना तप त्याग के किस्मत संवरता नहीं है
बिना तप त्याग के प्यार पुष्प खिलता नहीं
बिना तप त्याग के कुछ मिलता नहीं
इंसान है कि घर से हिलता नहीं
वह स्वयं से कभी मिलता नहीं
सफलता को ईश्वर के हाथ से जो छिनता नहीं
उसको इस जगत में कभी कुछ मिलता नहीं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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