सब कुछ आज इंसान के पास है
तब भी वह रहता बड़ा उदास है
घर,बंगला,और कार है
नौकर चाकर हजार हैं
तो भी इंसान बेरोजगार है
भरा पूरा परिवार है
तो भी सूना संसार है
संतोष की दरकार है।
- सहज कुमार
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