पहिला बार गांव छुटल
त अईसन लागल
कि देश दुनिया सब छुटल
गऊंवा याद आवेला
गऊंवा के लोग याद आवेला
याद आवेला
खेत खरिहान
याद आवेला
गंगा माई के मैदान
याद आवेला
बगईचा बागान
याद आवेला
अमरूद अउर आम
याद आवेला
भोर अउर शाम
याद आवेला
बाढ़ के पानी
याद आवेला
मूंजवानी
याद आवेला
बचपन,जवानी
याद आवेला
झोपड़ी अउर मकान
याद आवेला
गांव के दुकान
याद आवेला
लिट्टी,चोखा,चटनी
याद आवेला
खेत के कटनी
गऊंवा ना भुलाला
मनवा कुलबुला
रोजी रोटी के चक्कर में
दू पैसा के चक्कर में
गऊंए हमार छुटल
खेत,बधार सब छुटल।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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