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हैं देश सारे सुंदर

                
                                                         
                            हैं और देश भी सुंदर पर अपने वतन के बाद
                                                                 
                            
हैं और नदियां भी पावन पर गंग जमन के बाद
हैं और कर्म भी सुंदर पर अपने सत्कर्म के बाद
हैं और लोग भी सम्मानित पर माता पिता के बाद
हैं और तन भी सुंदर पर अपने तन मन के बाद
हैं और घर भी सुंदर पर अपने घर के बाद
हैं और गांव भी सुंदर पर अपने गांव के बाद।
- सहज कुमार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 दिन पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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