हैं और देश भी सुंदर पर अपने वतन के बाद
हैं और नदियां भी पावन पर गंग जमन के बाद
हैं और कर्म भी सुंदर पर अपने सत्कर्म के बाद
हैं और लोग भी सम्मानित पर माता पिता के बाद
हैं और तन भी सुंदर पर अपने तन मन के बाद
हैं और घर भी सुंदर पर अपने घर के बाद
हैं और गांव भी सुंदर पर अपने गांव के बाद।
- सहज कुमार
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