है स्वर्ग धरा पर
है सुख सारा धरा पर
जब कर्म से
बात व्यवहार
से टपके प्यार
टपके दुलार
बहे प्यार
बहे दुलार
जैसे गंगा की धार
जैसे यमुना की धार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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