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"बचपन की सुनहरी यादें"

                
                                                         
                            "बचपन की वह शरारतें,
                                                                 
                            
अपनों की वह बातें।
जुड़े रिश्तों से वह नाते,
अब क्यों टूटता जा रहा है।
मनुष्य सब भूलता जा रहा है,
आगे ही आगे बढ़ता जा रहा है।"
- अंकित कुमार
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4 दिन पहले

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