घर बनाओ शहर में तो चोरी का डर है
घर बनाओ पुश्तैनी गांव में तो क्या डर है?
कोई चाचा चाची काका काकी है
गांव का ऋण मेरे ऊपर बाकी है
गांव में सुरक्षा है
भले कम सुविधा है
गांव में सच्चा प्यार है
भले कम रोजगार है
गांव में प्यार की धार है
गांव में प्यार का आधार है
तो भी लोगों पर शहर का भूत सवार है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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