गगन के सारे
चांद तारे
लगते प्यारे
लगते न्यारे
हैं ये नयनों के तारे
हैं ये सुंदर सितारे
प्यारे प्यारे
न्यारे न्यारे
सुनो सितारों!
सुनो तारों!
तुम जैसा कैसे चमकूं मैं?
तुम जैसा कैसे दमकूं मैं?
बोलो
मुंह खोलो।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X