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एक तलवार से

                
                                                         
                            एक तलवार
                                                                 
                            
से तीन को दिया मार
थी शक्ति अपार
थे हमारे मंगल पांडे वीर
जो जन्में गंगा के तीर
बागी बलिया में
त्यागी बलिया में
वहीं जन्मा मैं
वहीं बढ़ा मैं
वहीं पढ़ा मैं
चाहता हूं देश को एक कर दूं
काम कुछ मैं नेक कर दूं
काम सुंदर सुंदर अनेक कर दूं
सारी अवनी को एक कर दूं
रात दिन एक कर दूं
सारी दुनिया को एक कर दूं
वीरता, साहस से अर्जुन बन जाऊं मैं
जंग महाभारत का जीत जाऊं मैं
राम बन जाऊं
श्याम बन जाऊं
शिवा,राणा प्रताप बन जाऊं
हिंदुस्तान का एक छाप बन जाऊं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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